Verse 74-आदत-Habit

हर आदत मकड़ी का जाला इसकी सख्त जकड़,
निकल न पाता जो फंस जाता, इस जाले अंदर |
जिस्म झिंझोड़े, उछालो-कूदो मुक्ति नहीं है मिलती,
बड़ा ही जकडालू होता है मकड़ियों का घर ||