Verse 227- इंद्रधनुष- Rainbow

इंद्रधनुष के झूले ने है चित्रित किया है अम्बर,
इसका बनना वायु में जल-कण पर है निर्भर |
इसी तरह जीवन में गर न बरसे प्रेम-फुहार ,
फीका-फीका लगने लगता महलों जैसा घर ||

Verse 174-कविता -Poem

कहे यदि वह मुझे कि- तेरी कविता है सुन्दर,
पूजूंगा उसको रख अपना माथा पैरों पर।
नहीं थकूंगा लेते उसके गोरे गालों का चुम्बन,
कर-कमलों से पकड़ के उसको ले आऊँगा घर ||

Verse 171-दुःख-Grief

वास्तु प्राप्त नहीं होती वह दिल मरता जिस पर,
मगर उदासी के होते हैं बहुत ही मीठे सुर।
दुखों की बेला में नादां दिल खुशियों को तरसे,
ख़ुशी मिले तो ग़मों को खोजे भूले-बिसरे घर ||

Verse 158-यादें-Memories

घर भूलता यादें , लेकिन याद भी होता घर,
घर बीमारी होता साथ ही वैद भी होता घर |
घर सुखी इक जैसे होते, हर दुखी घर भिन्न ,
पगडंडी का वक्र भी होता, सीधी दिशा भी घर ||

Verse 157-समस्त-Everything

घाव पे रखे कोमल फाहे ज़ख्म भी देता घर,
मर्मान्तक अपशय भी देता, यश भी देता घर |
घर का रंग उतर न पाए दूर रहो या पास ,
दूर भी देता सुर-लय मन को, पास  भी देता घर ||

Verse 87- मोहब्बत-Love

घर न होता छत-दीवारें न बेटी-पुत्तर,
घर न होता चारदीवारी, न रिश्ते-मित्तर |
घर होता है प्रीत-तराना, प्यार भरा सुर-ताल,
वारना सिर्फ मकान कहाता, नहीं कहाता घर ||

Verse-58-प्रेम के दर – Love’s Door

घाव भरवाने को आये है हम प्रेम के दर ,
बहुत यकी है आशाओं को , इस हाकिम के ऊपर |
ज़ख्मो पर फाहे रखता है , कोमल प्रेमिल हाथ ,
हंसी-खेल , आलिंगन , चुम्बन गुड़गुड़ियो का घर ||

Verse 120 – सरल जीवन – Simple Life

चल रे मन आ सुनें कहीं जा चिड़ियों की फुर-फुर,
जन्म -मरण के झंझट भूलें कड़वे और बे-सुर |
मस्त हुलारे लेकर मनवा झूले झूला आज ,
इन्ही सुहानी खुशियों में संग रंग ले अपना घर ||

Verse 115- मिलन -Communion

मैं बांधूंगा सेहरा जिसमें आशाओं की झालर,
बाराती बारात में मेरी वायदों के लश्कर |
प्रीत के मैं पंडित बुलवाऊँ, मंत्र प्रेम के सुनने,
रक्त का मैं सुन्दर सजा दूँ तेरे माँग-घर ||

Verse 46 – घर – Home

तीर्थ स्थान मिले बेगाने, हर एक तीर्थ पर,
गर्व करें अपनी भक्ति पर बड़े-बड़े मंदिर |
भक्त हैं एक-दूजे को देते पते-आशीषें-भेंटें,
पर सब जाते सुख पाने को अपने-अपने घर ||