Verse 201-खट्टा मीठा-Sour and Sweet

आस-निराश न समझे मेरा मनवा लाल-बुझक्कड़,
इस देती है मीठा चुम्बन दूजी जड़ती थप्पड़|
इक झगड़ालू लड़ती, दूजी आलिंगन में बांधे ,
दोनों के जब तार जुड़े तब संभला रहता घर ||

Verse 196-आयु -Age

लोग कह रहे मैं जियूँगा सौ-सौ वर्षों भर,
माथे की रेखाओं पर ही करता है निर्भर।
पर मैं करूँ दुआएं चाहे दो पल जीवन पाऊँ ,
किन्तु हों मदमस्त सभी पल, मधुशाला हो घर ||

Verse 102-बादल-Clouds

मेरी जान ! बरसना है तो बरसो बन बौछार,
झिजक, क्लेश मिटा दे सारे तू निर्भय होकर |
घोल दे हर शंका, बह जाने दे हर संशय को,
चलो डुबो दें कसक भरे, गहरे गहवर में घर ||

Verse 146- अति आत्मविश्वास- Overconfidence

एक पैंतरा सही पड़ा तो इतना गर्व न कर ,
जाने उल्टा पड़े दूसरा उसका ध्यान तू कर  |
ख़ुशी-गम में, नहीं मनाना अधिक ख़ुशी या गम ,

समता और संतुलन से बनता सहज सजीला घर ||

Verse 92-मुक्त – Free

भृकुटी माथे डाल के यारा, चित दुखी न कर,
द्वेषी, और रंजिश भारी पड़ते सदा ही प्रीती पर |
कड़वे बोल न बोल तू चाहे तोड़ दिलों के रिश्ते,
छोड़ यह रंजिश आओ चलें हम अपने-अपने घर ||

Verse 59-दिलेर – Brave

क्यों बुनते हो , सोचो लोगो, संकोची बुन्तर ,
कौन सा डर है तुम्हे सताता हुई है क्या गड़बड़ |
मौत का इक दिन निश्चित है फिर क्यों मरते रोज़ ,
खौंफ निकालो मन से तो ही , निर्भय होगा घर ||

Verse 57- दिल- heart

‘प्यार कृपण न, क्यों लगाए तू िक्कड़-दुक्कड़,
अपरिमित है दौलत इसकी , क्या करना गिन कर |
दिल इसका है औरो जैसा , जान लुटा देता है ,
बाँहों मेँ अम्बर भरता है तभी तो इसका घर ||

Verse 36 – सतत – Perseverance

शौक अनोखा पाला है गर मन मंदिर के अंदर,
साध बना लो उसको अपनी सब साधों से ऊपर |
भूख और लोभ को दिल से त्यागो, उसकी राह ना छोड़ो,
मिट जाये हस्ती तेरी या उजड़े तेरा घर ||

Verse 5 – जीवन चक्र – Life Cycle

जो आया है उसको जाना है , पूर्ण कर चक्कर,
इक पल हँसना खीझ घडी- भर थोड़ा माल-ओ -जर |
उसके बाद न सूरज होगा, ना होंगे तारे,
कलमुंहें अंधियारे में काँपेगा थर -थर -घर ||

Verse 3 – जी ले – Live

करले खर्च कमाई साड़ी जीवन है नश्वर ,
मिटटी की काया मिलनी है मिटटी के अंदर |
नहीं रहेंगे गीत गवैये ना दौलत ना आस ,
तुझको भी माटी होना है माटी होगा घर ||