Verse 207-सूत -Thread

देह सूत है मन चरखा है या मन है सूत्र ,
यही पहेली हल करने में बीती जाए उम्र|
देह-कताई चलती रहती क्या चरखा क्या सूत,
गिन न पाया इस बुनती के सारी उम्र मैं ‘घर’ ||

Verse 92-मुक्त – Free

भृकुटी माथे डाल के यारा, चित दुखी न कर,
द्वेषी, और रंजिश भारी पड़ते सदा ही प्रीती पर |
कड़वे बोल न बोल तू चाहे तोड़ दिलों के रिश्ते,
छोड़ यह रंजिश आओ चलें हम अपने-अपने घर ||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी वह गांव बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप अनूप पे जाके अटकी मेरी नज़र |
देख के उसको दिल खिल उठता रखूं उसको पास ,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर

Verse 77-चंचल मन-Playful mind

समझ सको तो यह मन ऐबी, पागल न चातुर,
पीड़ा से पैना हो जाता खुशियों से चंचल |
पर विवेक और पागलपन की सीमा साथ सटी,
जाने कौन किधर पिछवाड़ा, कौन दिशा में घर ||

Verse-58-प्रेम के दर – Love’s Door

घाव भरवाने को आये है हम प्रेम के दर ,
बहुत यकी है आशाओं को , इस हाकिम के ऊपर |
ज़ख्मो पर फाहे रखता है , कोमल प्रेमिल हाथ ,
हंसी-खेल , आलिंगन , चुम्बन गुड़गुड़ियो का घर ||

Verse 57- दिल- heart

‘प्यार कृपण न, क्यों लगाए तू िक्कड़-दुक्कड़,
अपरिमित है दौलत इसकी , क्या करना गिन कर |
दिल इसका है औरो जैसा , जान लुटा देता है ,
बाँहों मेँ अम्बर भरता है तभी तो इसका घर ||

Verse 55- मन – Mind

यह मन पाखी उड़ता जाए , भले थके हो पर,
उड़ते-उड़ते तन का चाहे बन जाये पिंजर |
न ही उसका ठौर ठिकाना , न इसकी मंज़िल,
लम्बी दिव्य उड़ाने पे निकला , पर न कोई घर ||

Verse 31 – चोर बजारी – Deception

बहुत मिला धन कुछ लोगो को मिला ना चैन मगर ,
चोर – बाजारी के कारण ही मन में समाया डर
मखमल के गद्दों पर भी न आती नींद उन्हें ,
चोर यदी मन में आ बैठे नरक बने है घर ||

Verse 48 – निर्भय दिल – Fearless Heart

हो अगर ना दिल मानव का निर्भय और निडर ,
तो मानवता खतरे में है मुझको लगता डर |
किस खातिर यह घर-चौबारे, लुटे जो अपनी लाज,
तोड़ो ऐसे महल-मीनारे , फूंको ऐसे घर ||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी एक गावँ बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप-अनूप पे जाकर अटकी मेरी नज़र |
देख के उसके दिल खिल उठता रखूँ उसको पास,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर ||