Verse 237-बेघर- Homeless

मुल्ला दे जो बांग तो उसकी बांग अनसुनी ना कर,
पंडित पूजा करे तो सुन ले उसका भी मंतर।
राम-रहीम तो हैं इन छोटी सीमाओं से दूर,
यह सारा ब्रह्माण्ड उसी ‘बेघर’ का अपना घर ||

Verse 191-नास्तिक-Atheist

मंदिर-मस्जिद मैं न जाऊँ, इन्सां मैं अक्खड़ ,
हिन्दू समझे नास्तिक हूँ मैं मुस्लमान काफ़िर।
नाम वियोगी इश्क़ हुआ है मुझको कविता संग ,
इसी लिए कविता देवी को पूजन अपने घर ||