Verse 237-बेघर- Homeless

मुल्ला दे जो बांग तो उसकी बांग अनसुनी ना कर,
पंडित पूजा करे तो सुन ले उसका भी मंतर।
राम-रहीम तो हैं इन छोटी सीमाओं से दूर,
यह सारा ब्रह्माण्ड उसी ‘बेघर’ का अपना घर ||

Verse 234-अभिलाषा- Desire

छोटे मन की लघु उड़ाने, बड़ों का ऊँचा अम्बर,
छोटे दर्द के छोटे मरुस्थल बालू ज़रा सा भीतर।
पीड़ा बड़ी के लिए चाहिए दिल भी बहुत विशाल ,
हर इक वस्तु माँगे अपने लिए मुनासिब घर ||

Verse 225- आतुर- Restless

कब से आतुर बैठा हूँ मै तुझसे नेह लगाकर,
और विलग न रह पाउँगा दशा हुई कातर |
मुझे बता प्रियतमा ऐसे प्रेम निभेगा कब तक ,
छोड़ विछोह , आ चलो बनाएँ रास्ता-बस्ता घर ||

Verse 186-ईंट-Bricks

नक़्शे सोचो, रूप विचारो सुन्दर घर के, पर,
अपना नाम लिखा लो चाहे ईंट-ईंट ऊपर |
खूब सजाओ खूब संवारो इसका कोना-कोना,
लोग देख कर बरबस बोलें, कितना सुन्दर घर ||

Verse 159-घर-Home

महल भी घर है, कुटिया घर है,  मग और  जंगल घर ,
कारागार को, मंदिर को भी  मान जो  लेता घर |
घर श्रद्धा है , मात्र नहीं यह दीवारों का वृत्त ,
जिस वास्तु में दिल रखोगे, दिल में करे वो घर ||

Verse 23- मंदिर – Devalya

एक दिन मई दुखियारा पहुंचा शिवजी के मंदिर ,
मगन खड़ा था शिव-अर्चन में साधु एक्कड़ |
मई बोलै विपता का मारा सीख दीजिये कुछ ,
बोलै वह, क्यों आये यहाँ पर तेरा मंदिर घर ||

Verse 22 – Sangharsh – Hustle

दिन चढ़ते ही पंख पखेरू , मेहनतकश चाकर,
जीने का संघर्ष है करते फिर कितने यह दिन-भर |
सांझढ़ले जब हो जाते है थक कर चकनाचूर ,
थकन मिटाने दिन भर की वो वापस आते घर||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी वह गांव बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप अनूप पे जाके अटकी मेरी नज़र |
देख के उसको दिल खिल उठता रखूं उसको पास ,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर

Verse 87- मोहब्बत-Love

घर न होता छत-दीवारें न बेटी-पुत्तर,
घर न होता चारदीवारी, न रिश्ते-मित्तर |
घर होता है प्रीत-तराना, प्यार भरा सुर-ताल,
वारना सिर्फ मकान कहाता, नहीं कहाता घर ||

Verse 10 – कुंज – Bowerbird

मत कर निंदा कुंज की ये तो लम्बा करे सफर,
विशराम-स्थल की खोज में चाहे थक जाते है पर|
खास जगह ही बने घोंसला , ममता का बंधन ,
लम्बे सफर पे फिर उड़ जाना छोड़ के अपना घर

Verse 28 – जोड़ – Connection

जो बेघर हैं उनके हित में इस दुनिया अंदर ,
अपना नहीं ठिकाना कोई ना ही अपना दर |
करें चाकरी घर-घर जा कर जमा करें दौलत ,
आशा है तो केवल इतनी हो अपना भी घर ||

Verse 34 – गुलदस्ते – Bouquets

घर की शोभा बने गृहस्ती और उसके अंदर
आशाओं के बीजों से ही फूटे प्रेमांकुर |
यह है क्यारी तू माली है सींच गुढ़ाई कर,
मधुर सुवासित गुलदस्तों से सजेगा तेरा घर ||

Verse 43 – पंक्ति – Line

दर-दर भटकूँ पूर्व, पश्छिम,दक्षिण, और उत्तर,
मुझसे कहीं छुपा रखे थे दाता ने अक्षर |
गली-गली मैंन भटका, कोमल पंक्ति मिली ना एक,
मिली अंततः मुझे अचानक खड़ी वो मेरे घर ||

Verse 46 – घर – Home

तीर्थ स्थान मिले बेगाने, हर एक तीर्थ पर,
गर्व करें अपनी भक्ति पर बड़े-बड़े मंदिर |
भक्त हैं एक-दूजे को देते पते-आशीषें-भेंटें,
पर सब जाते सुख पाने को अपने-अपने घर ||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी एक गावँ बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप-अनूप पे जाकर अटकी मेरी नज़र |
देख के उसके दिल खिल उठता रखूँ उसको पास,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर ||

Verse 10 – कुंज – Bowerbird

मत कर निंदा कुंज की यह तो लम्बा करे सफर,
विश्राम-स्थल की खोज में चाहे थक जाते हैं पर |
ख़ास जगह ही बुने घोंसले , ममता का बंधन ,
लम्बे सफर पे फिर उड़ जाना छोड़ के अपना घर ||