Verse 237-बेघर- Homeless

मुल्ला दे जो बांग तो उसकी बांग अनसुनी ना कर,
पंडित पूजा करे तो सुन ले उसका भी मंतर।
राम-रहीम तो हैं इन छोटी सीमाओं से दूर,
यह सारा ब्रह्माण्ड उसी ‘बेघर’ का अपना घर ||