Verse 216-लहर -Wave

नैय्या है कमज़ोर और लहरें आई है ऊपर ,
धारा में है तेज़ नुकीली चट्टानें-पत्थर।
घाट पे नर्तन करती पीड़ा, घुंगरुं उसके छनकें ,
आशाओं का मांझी , बोलो कैसे पहुँचे घर ||

Verse – 24 – आशा – Aasha

प्रीत का मै देवालय बना कर आया था भीतर ,
आशाओं का डीप जला तू प्रीत बना मंदिर|
पर एक देवी प्रीत की मलिका बोली कर्कश बोल,
न ये मंदिर तेरी खातिर न हे तेरा घर ||

Verse-58-प्रेम के दर – Love’s Door

घाव भरवाने को आये है हम प्रेम के दर ,
बहुत यकी है आशाओं को , इस हाकिम के ऊपर |
ज़ख्मो पर फाहे रखता है , कोमल प्रेमिल हाथ ,
हंसी-खेल , आलिंगन , चुम्बन गुड़गुड़ियो का घर ||