Verse 187-चिंता-Tensions

चिंता की रेखा छाए मानव के माथे पर,
हर पल उसके मन में रहता भयभीति का डर |
मौत से पहले उसे निगलता पशु बनैला बन,
रसता -बसता हँसता-गाता जंगल बनता घर||

Verse 151-जीवन यात्रा-Life journey

हम मुसाफिर, जीवन टैक्सी, चालक परमेश्वर,
रिश्ता आपस में तीनों का सादा और मुख’सर |
कोई पुकारे,  रोके टैक्सी फ़ौरन लेता सुन,
जेब में अगर किराया हो तो झट पहुँचता घर ||