Verse 238-हिंदुस्तानी- Indian

मुझे न भाएँ पौंड और रूबल खीचें न डॉलर ,
नहीं दासता करूँ किसी की मानूं न आर्डर।
मैं डुग्गर का वासी सह सकता हूँ भूख व प्यास,
देश बेच कर कभी बनाऊंगा न अपना घर ||

Verse 83-गांधी-Gandhi

गांधी बना न जाए यारो,पहन के तन पे खद्दर,
गांधी टोपी पहन के या फिर लम्बे देकर लेक्चर |
कर्मों का योगी था गांधी, सत्य था उसका बल,
राज दिलों पे करता था पर स्वयं था वह बेघर ||