Verse 143-प्रेम -Love

उलट-उलट कर खत्म न होती प्रेम-भरी गागर,
स्वयं देख ले इसे उलट कर, इसको खाली कर |
इसके जैसी अंतहीन हो चाहे इसकी प्यास,
चिंता न कर, कर दे खली, अतल हमारा घर ||