Verse 236-डुग्गर- Duggar

जम्मू में है ग’रने-वसाका थूहर और कीकर,
साँप, ‘गनाह’ बिच्छू ज़हरीले और विषैल विषधर।
लेकिन यहाँ की बोली मीठी जाने सब यह बात ,
जिस के कारण गूँज रहा है डुग्गर का घर-घर ||

Verse 181-जवान -Soldiers

हाथ जोड़ के वंदन करना गए जो जम्मू नगर,
शीश झुका कर उसकी मिट्टी का करना आदर।
रक्त से इसको सिंचित करते बेटे शेर जवान,
बेशक बंजर कहलाता है पर वीरों का घर ||

Verse 50 – सन्नासर- Sannasar

एक दफा मैं निपट अकेला गया था सन्नासर ,
चुम्बक जैसे कोई खींच लोहे को ऊपर |
सर इसका सूखा है लेकिन सुन्दर सहज नज़ारा,
अगर कहीं तौफीक हुई तो यहाँ बनाऊंगा घर ||