Verse 48 – निर्भय दिल – Fearless Heart

हो अगर ना दिल मानव का निर्भय और निडर ,
तो मानवता खतरे में है मुझको लगता डर |
किस खातिर यह घर-चौबारे, लुटे जो अपनी लाज,
तोड़ो ऐसे महल-मीनारे , फूंको ऐसे घर ||