Verse 201-खट्टा मीठा-Sour and Sweet

आस-निराश न समझे मेरा मनवा लाल-बुझक्कड़,
इस देती है मीठा चुम्बन दूजी जड़ती थप्पड़|
इक झगड़ालू लड़ती, दूजी आलिंगन में बांधे ,
दोनों के जब तार जुड़े तब संभला रहता घर ||