Verse 72-पतंग – Kite

जीवन एक पतंग की नांईं, छूती है अम्बर,
परवाह नहीं जो मांझा देता चीरें हातों पर।
कस के रख तू बिना ढील के, मांझा बहुत है तेज़,
यदि लड़ाने पेंच चढ़ा कर लाने वापिस घर ||