Verse 163- पांडित्य- Wisdom

पंडित मनके क्यों फेरे है माला को लेकर ,
मन के गहवर से उठती है ज्ञान की कोई लहर |
लहर वह सच्ची दिशा दिखाए, जीवन-सार सुझाए,
माला के मनके गिनने से ज्ञान ना आता घर ||

Verse 107-ज्ञान-Knowledge

एमर्सन को वेद ज्ञान क्या? कहते प्रोफेसर
उसकी लिखी कविता ‘ब्रह्मा’ एक बार तो पढ़ |
वे कहते ईसाई विधर्मी गीता पाठ क्यों करता ,
मैं कहता वह सार ज्ञान का, और इक सांझा घर ||

Verse 109-स्वामी-Master

‘राजपूत-स्कूल’ में पढ़ते ,जम्मू के अंदर
बेली राम हुआ करते थे हिस्ट्री के मास्टर |
ऐसा सबक पढ़ाया उन्होंने इस जीवन का सुन्दर
भूला नहीं, तभी बन पाया दिव्य मेरा यह घर ||

Verse 108-जम्मू-Jammu

जम्मू विश्वविद्यालय गया मैं , शिक्षा के मंदिर
गीता बाइबिल मुझे ना दीखे-कहते प्रोफेसर |
“काहे ढूंढ रहे हो यह सब, साइंस वगैरह पढ़ लो ,
मैं कहता अंधकार-में हो तुम रहकर बिजली-घर ||

Verse 17 – उम्र – Age

किसी ने पूछा कितना अनुभव कितनी तेरी उम्र ,
अभी किया न लेखा-जोखा हुई बहुत गड़बड़ |
मानव उमरे ही गिनता है उस पल जब के फिर ,
कुछ न गिनने को बचता है बैठ अकेले घर ||