verse 86-कविता- Poem

कविता को अब कहाँ मिलेंगे ऐसे बहते सरोवर,
कालिदास और षैली ग़ालिब कविता स्रोत अमर।
एक वियोगी नामक नादां, नए सुरों में खोया,
बहने की तरकीबें सोचे बैठे-ठाले घर।।