Verse 136-मोहब्बत-Love

तू होती जो फूल मैं होता एक हरा पत्तर  ,
एक-दूसरे की संगत में लेते काट उमर |
अगर काँपते सर्दी में भी रहते हम जुड़ कर,
गर्मी में भी साथ साथ रह सजा ही लेते घर ||

Verse 122 – फूल – Flower

जीवन क्या है ? घास का तिनका, मैं सोचूँ अक्सर,
अथवा फूल क्यारी का है रंग बहुत सुन्दर |
एक हवा के झोंके से ही बिखरे फूल और पात,
जिस घर उगते फूल वो बनता अजब अनोखा घर ||