Verse 103- शेर-Lion

बहुत ही सुन्दर और बहादुर शेरों में बब्बर,
मगर शेरनी बच्चे पाले ठांव-ठांव जाकर |
शेर तनिक न बने सहायक काहे का वनराज,
निज-हितकारी गृह-स्वामी का घर निकम्मा घर ||

Verse 57- दिल- heart

‘प्यार कृपण न, क्यों लगाए तू िक्कड़-दुक्कड़,
अपरिमित है दौलत इसकी , क्या करना गिन कर |
दिल इसका है औरो जैसा , जान लुटा देता है ,
बाँहों मेँ अम्बर भरता है तभी तो इसका घर ||