Verse 8 – प्रेमपत्र – Love Letter

प्रीत मचा देती है कैसी आंधी और झक्कड़,
मैं न समझूँ प्यार- व्यार को मै नादां अनगढ़ |
मुझे बता दो लिख कर, क़ैसे लिखते हैं चिट्ठी,
ख़ुद डाकिया बन कर दूँगा चिट्ठी तेरे घर ||

Verse 6 – पत्र -Letter

न आते न बुलाते न चिट्ठी- पत्तर ,
हाल- हवाल न पूछें न ही लेते कोई खबर |
मैं लजालू क्या बतलाऊँ, कितनी उनकी चाह,
स्वाद खून का लगा शेरनी भूखी रखी घर ||