Verse 90-झिण्डी – Shrimp

‘झिड़ी’ के मेले यात्री आकर करते हैं ‘जातर’,
चिंताओं में आकुल होकर सीखते हैं मंतर |
वहम दिलों के, भूत न निकले, जातर-वातर करके,
वहम के कारण भूत-बंगले बनें है उनके घर ||