Verse 158-यादें-Memories

घर भूलता यादें , लेकिन याद भी होता घर,
घर बीमारी होता साथ ही वैद भी होता घर |
घर सुखी इक जैसे होते, हर दुखी घर भिन्न ,
पगडंडी का वक्र भी होता, सीधी दिशा भी घर ||