Verse 224- स्री- Woman

पुरुष सांड है प्यार है उसका जिस्मों की थर-थर ,
औरत गाय है उसकी प्रीत में होता बहुत सबर |
बीज गरब में धारण करती, रक्त से करती सिंचन ,
पुरुष बीज दाल कर केवल उसे बिठाता घर |