Verse 142-अभाव- Meanness

सारवान ने बाँध सभी कुछ ठूस लिए ‘त्रंगड़’,
मुट्ठी भर न भूसा छोड़ा ऊँट के लिए मगर |
हर पल इसी कहानी को दुहराते आए लोग ,
हलवाहे की मेहनत जाती साहूकार के घर ||