Verse 180-साहसी-Brave

जीना दूभर हो जाए जब बन जा तू निडर ,
हिम्मत टूट गई तो समझो रहे न खोज-ख़बर।
काम पे जाते बेटे को यह कहती निर्धन माँ,
लौट के तुम आ जाना बेटा अपनी माँ के घर ||

Verse 16 – माँ – Mother

खीझ न मेरी अम्मा न तू ऐसे रूठा कर ,
बतलाता हूँ कहाँ रहा मई फिरता यूँ आखिर |
एक गौरेया घर थी बुनती उसको झाड़ा हैरान ,
रहा देखता देर लगी यूँ मुझे लौटते घर ||

Verse 25 – मां – Mother

एक ज़िद्दी और चंचल बालक चढ़ा जो पीपल पर ,
अम्मा जा तू, न लौटूंगा साँझ ढले तक घर |
ठोकर लगी जो अनजाने में हुआ वह लहूलुहान ,
ज़ोर ज़ोर से रोते बोला ले चल अम्मा घर