Verse 189-हर्षित-Joyful

ढोली ढोल बजा कर कहता कर ले तू ‘जातर’,
संग मसान के खेल-कूद ले नाच ताल के ऊपर |
मैं तो डग-डग थाप लगाऊँ, जो भी मन को भाए,
नाच ले , या अनमना बैठ धुन्धुआता रह तू घर ||

Verse 87- मोहब्बत-Love

घर न होता छत-दीवारें न बेटी-पुत्तर,
घर न होता चारदीवारी, न रिश्ते-मित्तर |
घर होता है प्रीत-तराना, प्यार भरा सुर-ताल,
वारना सिर्फ मकान कहाता, नहीं कहाता घर ||