Verse 97-क्षितिज- Horizon

मानव जैसे-जैसे चलता साथ चले अम्बर
क्षितिज की दूरी चलते-चलते मिटती नहीं मगर |
द्रिष्टी और पृथ्वी के सम पर क्षितिज बना ही रहता,
इस तरह जो चले उम्र भर कभी न पहुँचे घर ||

Verse 122 – फूल – Flower

जीवन क्या है ? घास का तिनका, मैं सोचूँ अक्सर,
अथवा फूल क्यारी का है रंग बहुत सुन्दर |
एक हवा के झोंके से ही बिखरे फूल और पात,
जिस घर उगते फूल वो बनता अजब अनोखा घर ||

Verse 125 – रौशनी – Light

ईश्वर ने है दिए रात को अनगिन नयन हज़ार,
जब डूबे है सूरज दुनिया सो जाती अक्सर।
लौ की प्यासी दुनिया को न मिलते प्रेम-सपन,
लालटेन पाकर अँधियारा, जगमग करे है घर।|

Verse 120 – सरल जीवन – Simple Life

चल रे मन आ सुनें कहीं जा चिड़ियों की फुर-फुर,
जन्म -मरण के झंझट भूलें कड़वे और बे-सुर |
मस्त हुलारे लेकर मनवा झूले झूला आज ,
इन्ही सुहानी खुशियों में संग रंग ले अपना घर ||