Verse 179-प्रिय -Beloved

रूप तेरा यह रहने न दे सुधबुध रत्ती भर,
तुझे बैठा कर मेरी सजनी सर और आँखों पर।
ऐसा मेल-मिलाया मैंने शिव-गौरी भी उचके ,
जिस शब तूने रात गुज़री पहली मेरे घर ||