Verse 184-प्राचीन परंपरा-Old Tradition

पुरखों के हाथों से निर्मित तोड़े यह मंदिर,
अब लोगों में सोच भोथरी समां गई भीतर |
निज सभ्यता की निंदा का फैल चूका फैशन,
रहते मौन जो पूछ ले कोई कौन-सा उनका घर ||