Verse 155-वास्तविकता- Reality

लोग तमाशा सदा देखते बैठ किनारे पर ,
पर जिस वक़्त पड़ेंगे मुँह पर लहरों के थप्पड़ |
ज़ोर जबर लहरों का समझ में तब उनके आएगा ,
नुक्ताचीनी सब भूलेगी अक्ल करेगी घर ||