Verse 195-वेदना -Anguish

कहे वेदना कलाकार से सुन मेरे मित्र ,
निपट अकेली रेखाओं से बना रहा चित्र।
तेरे चित्रों में जीवन की रंगत तब झलकेगी ,
जब मेरे हित खाली रखोगे तुम मन का घर ||

Verse 157-समस्त-Everything

घाव पे रखे कोमल फाहे ज़ख्म भी देता घर,
मर्मान्तक अपशय भी देता, यश भी देता घर |
घर का रंग उतर न पाए दूर रहो या पास ,
दूर भी देता सुर-लय मन को, पास  भी देता घर ||

Verse 154-अंटोनी और क्लियोपैट्रा-Antony and Cleopatra

क्लियोपेट्रा ने छाती से लगा लिया विषधर ,
अंटोनी ने घोंप लिया था  सीने में खंजर |
यह बलिदान मोहब्बत का क्यों नहीं सराहें लोग,
सोहनी और महिवाल के किस्से प्रचलित घर-घर ||

Verse 144-चिंता -Worry

नसों में मेरी अजब अनोखी भर देती तिर-मिर,
बिजली है यह सोच की मानो तिल जितना कंकर |
शांत झील में गिरे तो लहरें पैदा करें अनेक,
चिंताओं से काँप रहा है थर-थर मेरा घर ||

Verse 139 – कर्म – Karma

छत टपके है टप-टप  मेरी, हे मेरे गुरुवर,
भैंस ब्याहे बीते  बरसों, बैल चोर के घर |
तब मानूँ जो कहो ना, मेरे कर्मों में थी खोट,
बैठ मेरे संग सोच-विचारो टपके क्यों कर घर ||

Verse 110- परमेश्वर-god

मुहम्मद,मरियम, महावीर और सिखों के सतगुर
ईसा,बुद्ध, लाओत्से, मोजिज रूहों के डॉक्टर |
पीड़ा छलनी करे कलेजा कोई दवा नहीं देता ,
कई लुकमान बने बैठे है अपने-अपने घर ||

Verse 134 – खून – Blood

तेज़ बहुत है तेज़ बहुत है तेज़ बहुत खंजर
खून हुआ हाँ खून हुआ हाँ खून हुआ भयंकर |
चीर दे चाहे चीर दे पर अब रहा ना जाए अकेला ,
मरना है तो मरना मुझको आके तेरे घर ||