Verse 208-पूर्वज -Ancestors

कहे कहावत मात-पिता की करनी भुगतेय पुत्तर ,
लेकिन ऐसी चिंताओं से उठ जा तू ऊपर |
बुरा किया जो पुरखों ने, तू भोग ले उसका अपयश,
पर अच्छाई उनकी लेकर सजा ले पाना घर ||

Verse 51- निरंक घर- Empty

घर हौंसला होता है बच्चे मांगे बहियन पर,
पंख मिले तो भरे उड़ाने बच्चे गिर फर-फर|
बैठे अकेले अम्मा रोती , रहता बाप उदास,
नीड बनाते बच्चे अपना, कर के सूना घर