Verse 119-प्रेमी -Lover

मुझे खेद है क्यों उपलब्ध न मदिरा का सागर,
क्यों नहीं गुल्ली-डंडा? क्यों न चिड़िया की चूर-मुर |
इन कष्टों में डूबे मुझको याद सताए तेरी ,
फिर सोचूँ सब ठीक है जब तक तुम हो मेरे घर ||

Verse 121 – आज – Present

आज तो बस है आज कहूँ मैं चल तू इसी डगर,
इंतज़ार ही आया हिस्से कल ना आया मगर |
आज को आज ही भोगूँगा कल की जाने कौन,
कल न जाने किसका होगा आज है मेरा घर ||