Verse 128 – बाहरी सुंदरता – Physical love

वह कहती महके है तन मेरा होंठ मेरे शक्कर,
उस पर मुझे यकीन तभी करूँ उसका मई ज़िक्र।
पूछ न मुझसे कैसे उसको इसका मिला सुराग,
क्या बतलाऊँ इक दिन चोरी मिला मुझे था घर ||