Verse 197-हल -Plough

हल जोत के हठ और नरमी बन जा तू हलधर ,
खुले खेत में हल चला ले बन कर मस्त-कलंदर |
बीज प्रेम का क्यारी-क्यारी , पंक्ति-पंक्ति बो ले ,
नेक सुहानी फसलें काट के भर ले अपना घर ||