Verse 182-केहरि सिंह “मधुकर”-Kehri Singh “Madhukar”

बदल भैया बरसोगे जब डुग्गर देश में जाकर,
मिलना उससे जिसका नाम है केहरि सिंह ‘मधुकर’ |
मेरी वाह-वाह देकर उसको ‘डोली’ कविता पर,
उसका उत्तर बिना सुने ही लौट आना तुम घर ||

verse 86-कविता- Poem

कविता को अब कहाँ मिलेंगे ऐसे बहते सरोवर,
कालिदास और षैली ग़ालिब कविता स्रोत अमर।
एक वियोगी नामक नादां, नए सुरों में खोया,
बहने की तरकीबें सोचे बैठे-ठाले घर।।