Verse 203-ताला-Lock

व्यक्त मई जो भी करना चाहूँ संधे नहीं अक्षर,
सोच तो दिव्या है मेरी किन्तु अक्षर है अक्खड़ |
माँ बोली की सीमाओं ने कंठ किया अवरुद्ध ,
भीतर कैसे जॉन यह है तालाबंद इक घर |

Verse 151-जीवन यात्रा-Life journey

हम मुसाफिर, जीवन टैक्सी, चालक परमेश्वर,
रिश्ता आपस में तीनों का सादा और मुख’सर |
कोई पुकारे,  रोके टैक्सी फ़ौरन लेता सुन,
जेब में अगर किराया हो तो झट पहुँचता घर ||