Verse 199-चूहा -Rat

मेरी सोच में छाया जाने कैसा यह फितूर,
जैसे मूषक रात भर करते कुतर -कुतर |
किस वस्तु की मुझे लालसा किसकी खोज करूँ ,
चिंताओं के चूहों ने तो किया खोखला घर ||