Verse 133 – दर्द – Pain

प्रीत लड़ी जो टूटे उसमें गांठ लगा ले, पर,
धागा फिर भी जुड़ है गांठ ना जाए पर |
कड़वे बोल लगाते आए दिल पे गहरे घाव ,
दुःख की बारिश में निश्चित ही टपके ऐसा घर ||

Verse 132- दुनिया – World

मेरे प्यार को नज़र लगाती देखे देखे बितर-बितर ,
दुनिया मुझको कुचल-कुचल कर करती है गोबर |
मैं गोबर यह लेकर अक्सर लेपूं वो दीवार ,
जिस जगह पे टंगी है तेरी फोटो मेरे घर ||