Verse 222-एकाकी-Alone

बिन तेरे मैं साथी, भटकूं दुनिया में दर-दर ,
मेरा कोई हमदम न था तरसा जीवन भर |
चाहत-संशय-तर्क अनगिनत देह में रहे समाये ,
और नसों मैं हुए धमाके ढह गया मेरा घर |

Verse 171-दुःख-Grief

वास्तु प्राप्त नहीं होती वह दिल मरता जिस पर,
मगर उदासी के होते हैं बहुत ही मीठे सुर।
दुखों की बेला में नादां दिल खुशियों को तरसे,
ख़ुशी मिले तो ग़मों को खोजे भूले-बिसरे घर ||

Verse 166-विप्रलंभ-Separation

सुन विलाप हीर का हरगिज़ ठट्ठा-हँसी न कर,
बारिसशाह का किस्सा सुनकर सिसकी आहें भर |
इक -दूजे को तरसें रहें, दुनिया करे अलग,
शोक भरे दुखांत यह किस्से,शोकाकुल है घर ||

Verse 146- अति आत्मविश्वास- Overconfidence

एक पैंतरा सही पड़ा तो इतना गर्व न कर ,
जाने उल्टा पड़े दूसरा उसका ध्यान तू कर  |
ख़ुशी-गम में, नहीं मनाना अधिक ख़ुशी या गम ,

समता और संतुलन से बनता सहज सजीला घर ||

Verse 39 – रंगमंच – Rangmanch

रंगमंच जो घर मेँ हो तो फिर उसके अंदर,
भेदभाव की दीमक लगती है और व्यापे डर |
ऊपर-ऊपर प्रेम दिखावा भीतर विश्वास ,
इसी तरह जर्जर हो जाते है खड़े खड़े ही घर ||

Verse 98-इंतज़ार-Wait

इंतज़ार के पल लगते हैं भारी वर्षों पर
प्रति-पल भरता अनगिन चिंता ह्रदय के भीतर |
मधुर-मिलन के साल बीतते आँख झपकते ही ,
इंतज़ार में तिल-तिल करके जलता अपना घर ||

Verse 65-मोहिनी – Illusion

छलिया क्षितिज उम्मीद जगा कर डाले सौ चक्कर ,
छल मरीचिका और बनाती पीड़ा को दुःख कर |
जलते-तपते मरुस्थलों मेँ इंसा चलता जाता ,
उफ़क की दूरी काम न होती आस न आती घर ||

Verse 61-पिंजरा – Cage

आस सुरो की मारक-धाकड़ घेरे है मिल कर ,
पकड़ दुनाली चले शिकारी जब बोले तीतर |
मौत के डर से कैसे कोई अपनी उमंगें छोड़े ,
ताल-सुरो का गाला जो घोंटे , पिंजरा बनता घर ||

Verse 52- नज़र – Eyes

तेरी नज़र मेँ तेज़ और तीखे और पैनी नश्तर ,
चुभते है जब तो रहता है इनका मुझे न डर |
कसक सुहानी और मद- महकी यह देते मुझको ,
तभी इन्हे मै बिना निकले लेकर आया घर||

Verse 54- पराया -Alienation

शिकार यार बनाया झेले ज़हरीले खंजर ,
दिल का मॉस खिलाया उसके टुकड़े टुकड़े कर|
पर उसने ये चुग्गा चुग कर ऐसी भरी उड़ान,
खेत पराये जाकर बैठा, बैठा दूजे घर ||

Verse 51- निरंक घर- Empty

घर हौंसला होता है बच्चे मांगे बहियन पर,
पंख मिले तो भरे उड़ाने बच्चे गिर फर-फर|
बैठे अकेले अम्मा रोती , रहता बाप उदास,
नीड बनाते बच्चे अपना, कर के सूना घर

Verse 26 – शराब – Alcohol

मज़दूर के पैसे लेके जाता ठेके पर,
घर आकर फिर गर्जन करता यह कंजरी का घर |
प्रेत नशा, न दिखते उसको बच्चे भूखे-प्यासे,
घर घोंसला होता है जो समझे उसको घर ||

Verse 36 – सतत – Perseverance

शौक अनोखा पाला है गर मन मंदिर के अंदर,
साध बना लो उसको अपनी सब साधों से ऊपर |
भूख और लोभ को दिल से त्यागो, उसकी राह ना छोड़ो,
मिट जाये हस्ती तेरी या उजड़े तेरा घर ||

Verse 11 – समानांतर – Parallel

जैसे झरने ढूंढे नदियां ,नदियां दूँढे सर,
जैसे हवा आसमानों में खोजे निज दिलबर |
कोई यहाँ नहीं एकाकी सभी हैं जोड़ीदार,
प्रीत में फिर क्यों मिल न पाते तेरे मेरे घर ||

Verse 6 – पत्र -Letter

न आते न बुलाते न चिट्ठी- पत्तर ,
हाल- हवाल न पूछें न ही लेते कोई खबर |
मैं लजालू क्या बतलाऊँ, कितनी उनकी चाह,
स्वाद खून का लगा शेरनी भूखी रखी घर ||

Verse 2 – जीवन – Life

एक टुकड़ा मैं रोटी मांगू सोने से बस नुक्कड़ ,
इक पल मांगू मुस्काने को , इस धरती के ऊपर |
रोने का एक पहर मैं मांगू , लोटा एक शराब,
ओक से रह-रह पीड़ा चलके , यही है जीवन घर ||