Verse 171-दुःख-Grief

वास्तु प्राप्त नहीं होती वह दिल मरता जिस पर,
मगर उदासी के होते हैं बहुत ही मीठे सुर।
दुखों की बेला में नादां दिल खुशियों को तरसे,
ख़ुशी मिले तो ग़मों को खोजे भूले-बिसरे घर ||

Verse 158-यादें-Memories

घर भूलता यादें , लेकिन याद भी होता घर,
घर बीमारी होता साथ ही वैद भी होता घर |
घर सुखी इक जैसे होते, हर दुखी घर भिन्न ,
पगडंडी का वक्र भी होता, सीधी दिशा भी घर ||

Verse 157-समस्त-Everything

घाव पे रखे कोमल फाहे ज़ख्म भी देता घर,
मर्मान्तक अपशय भी देता, यश भी देता घर |
घर का रंग उतर न पाए दूर रहो या पास ,
दूर भी देता सुर-लय मन को, पास  भी देता घर ||

Verse 139 – कर्म – Karma

छत टपके है टप-टप  मेरी, हे मेरे गुरुवर,
भैंस ब्याहे बीते  बरसों, बैल चोर के घर |
तब मानूँ जो कहो ना, मेरे कर्मों में थी खोट,
बैठ मेरे संग सोच-विचारो टपके क्यों कर घर ||