Verse 18 – बचपन – Childhood

छड़ी बलूत की हाथ में मास्टर जी आते लेकर,
हमने सबक न याद किया है हम तो है निडर |
घर पहुंचो तो याद न रहते मास्टर और स्कूल,
नयी ही दुनिया हो जाती है अपना कच्चा घर ||

Verse 18 – बचपन – Childhood

छड़ी बलूत की हाथ में मास्टर जी आते लेकर,
हमने सबक न याद किया है हम तो है निडर |
घर पहुंचो तो याद न रहते मास्टर और स्कूल,
नयी ही दुनिया हो जाती है अपना कच्चा घर ||