Verse 130 – मच्छर – Mosquito

एक तो आँख लगे न ऐसी लगी नज़र ,
दूजा, भू-भू करके काटे उस पे है मछर |
लेटे-लेटे सोच रहा हूँ , क्यों लेटा हूँ मैं ,
क्यों न मैं भी मछर बन कर जाऊँ उसके घर ||