Verse 226-कुंजों- Bower

‘कुंजों’ की निंदा होती है-देश है यह डुग्गर,
छोटे पंखिन से सीमित है इनका सदा सफर |
अन्य कोई भाषा न करती कुंजों का तिरिस्कार ,
इसी लिए की इन कुंजों के बहुत दूर है घर ||