Verse 167-बल- Strength

‘बस इतना ही?’ मुझे चिढ़ाए तू यह कह-कह कर,
जितनी पीड़ा भोगी मेरी उतनी सख्त पकड़ |
ढीली लगे तो सारे जग का दर्द संभाल के रखना
और उषे ले रूह मेरी तू, आना नेरे घर ||