Verse 149- संतोष- Contentment

जो भी देता दाता उसका करता अदा शूकर ,
काम होता या ज़्यादा होता मुझको नहीं ख़बर |
स्वर्गानन्द उठाते कुटिया में भी रह खुश-दिल ,
दुखी जानो को महलों में भी लगते छोटे घर ||