Verse 82- विचार- thoughts

जितने मन हैं उतनी सोचें उतने ही अंतर,
अपने-अपने नाप से सब के बनते हैं वस्र |
भेद सोच का है यह सारा, अपनी-अपनी खोज,
जिसको जैसा भाया, वैसा लिया बनाए घर ||

Verse 127 – स्नेह – Affection

सारी खुशियाँ,सोच, वासना प्रीत के हैं चाकर,
इसके मेह्तर-वैद, संतरी सब इसके नौकर |
कोई अगर लालसा जिगर जलाये वह भी इसकी दास,
प्रीत है मलिका, चले हुकूमत इसकी है घर-घर ||