Verse 217-कोना -Corner

बिटुए नुक्कड़ में बैठ कर क्यों करते हो खुर-खुर,
नहीं उठ रहे पाट ये भारी चक्की के सर पर।
नहीं उठ रहे तो रहने दो तेरी आस है कोमल ,
यह अभिलाषा ठोस बनाएगी आशा का घर||