Verse 63-तुलसी – Tulsi

तुलसी पिछवाड़े है रोपी आँगन बीच है ‘बड़’
मन के भीतर कपट भरा है दागा न उस से कर |
‘वह’ पहचाने सब को , जाने समझ हर इक चाल ,
तुलसी, पीपल, जप-तप से तो आता नहीं वह घर ||