Verse 116-दिल टूटना -Heartbreak

नई रीत यह चली है कैसी अब के तेरे नगर,
जिस से पूछूँ तेरा ठिकाना बरसाए पत्थर |
तेरे  शहर के लोगो ने ना नाम सुना है मेरा,
मेरे लिए या स्वयं तुम्हीं ने बंद कराया घर  ||